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यूजीसी इक्विटी रेगुलेशन 2026 के समर्थन में कानपुर में पैदल मार्च, राष्ट्रपति को सौंपा ज्ञापन

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कानपुर, 17 फरवरी, 2026 सामाजिक संगठनों के संयुक्त मंच और उसके सहयोगी विभिन्न जन संगठनों के द्वारा माननीया राष्ट्रपति महोदया को यूजीसी इक्विटी रेग्युलेशन 2026 के समर्थन में कानपुर की पूर्व सांसद सुभाषिनी अली और प्रॉ० बृजेश कटियार के नेतृत्व में ज्ञापन देने आज पैदल मार्च के द्वारा एक प्रतिनिधिमंडल जुलूस की शक्ल में हलीम मुस्लिम डिग्री कॉलेज, चमन गंज से जिलाधिकारी महोदय के कार्यालय कानपुर नगर देने पहुँचा। इस मौके पर सामाजिक संगठनों के जिला संयोजक साथी गोविंद नारायण जी ने अपने वक्तव्य में कहा कि यूजीसी ने हाल ही में नियमावली के नियम 3(सी) में सुधार और बदलाव की अधिसूचना जारी की थी, जिन्हें 15 जनवरी 2026 से लागू कर दिया गया था। यूजीसी रेगुलेशन 2026 के खिलाफ सर्वोच्च न्यायालय मे याचिका कुछ मनुवादी तत्वों ‌द्वारा दायर की गई। जिस पर माननीय सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश की बेंच ने यूजीसी 2026 के नए नियमों को (अस्पष्ट) दुरुपयोग योग्य बताते हुए रोक लगा दी। जो बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है, अगली सुनवाई 19 मार्च 2026 तक 2012 के नियमों को जारी रखने का आदेश भी दिया है। सर्वोच्च न्यायालय ‌द्वारा यूजीसी इक्विटी रेगुलेशन 2026 पर की गई रोक से पूरे देश में एससी/एसटी/ओबीसी छात्रों व सामाजिक संगठनों में आक्रोश व्याप्त है।

ऐसी स्थिति में सामाजिक संगठनों का संयुक्त मंच, जनवादी संगठन, जन संगठन, महिला संगठन, सद्भावना समिति, अधिवक्ता के संगठन महामहिम राष्ट्रपति महोदया जी से ज्ञापन द्वारा मांग कीः--
यूजीसी इक्विटी रेगुलेशन 2026 पर सर्वोच्च न्यायालय द्वारा लगाई गई रोक को निरस्त करने के लिए भारत सरकार अपना पक्ष मजबूती से रखने के लिए अपने तेज तर्रार वरिष्ठ अधिवक्ताओं को जल्द से जल्द तैनात करे और यूजीसी इक्विटी नियम 2026 को और प्रभावशाली बनाए । उनका दायरा आईआईटी, आईआईएम, चिकित्सा और इंजीनियरिंग विश्वविद्यालय आदि सभी केंद्रीय व राज्यों के उच्च शिक्षण संस्थानों तक विस्तारित करने के लिए अपने अधिकारियों को कहें और लोकतांत्रिक पद्धति को अपनाते हुए इस कानून कोप्रभावी व संविधान के संघीय स्वरूप के अनुरूप बनाए जाने के लिए भी अपना पक्ष माननीय न्यायलय के समक्ष मजबूती से रखें।
सामाजिक संगठनों के संयुक्त मंच के सह-संयोजक औसान यादव ने अपने वक्तव्य में कहा ऐसा होने से ही उच्च शिक्षण संस्थानों में बढ़ते हुए जातिय भेदभाव और जातिय उत्पीड़न से बढ़ती हुई आत्महत्याओं की घटनाओं को रोका जाना संभव होगा तथा उच्च शिक्षा में एससी, एसटी, और ओबीसी तबके के वंचित हिस्से को समान अवसर प्राप्त हो सकेगा साथ ही साथ बिना किसी भेदभाव, जाति-धर्म निर्विशेष शिक्षण संस्थानों में सर्व समाज के छात्र एक साथ शिक्षा पा सकेंगे।

संगठन के वरिष्ठ सदस्य साथी देवी प्रसाद निषाद और राजेश आजाद जी ने यूजीसी इक्विटी रेग्युलेशन 2026 के उसके मूलरूप में लागू न होने तक इस आंदोलन को जारी रखे जाने की बात कही।
ज्ञापन देने की कारवाई में और पदयात्रा में प्रमुख रूप से पूर्व सांसद सुभाषिनी अली, प्रोफेसर बृजेश कटियार, औसान यादव, अतर सिंह, देवी प्रसाद निषाद, जगतपाल, राहुल देव, अनिल कुमार प्रजापति, डॉक्टर एस के चौधरी, राजेश आजाद, हाजी सलीस, बलराम सिंह, एड. सोनेलाल गौतम, एड. आनंद गौतम, एड. हिमांशु जनवादी, एड. मोहम्मद वारिस, मोहम्मद खालिद, मलखान सिंह, अरुण कुमार, शिव कुमार सोनवानी, रमेश वर्मा, हरिशंकर वर्मा, उमाकांत विश्वकर्मा, साथी विनोद, प्रताप साहनी, देवेंद्र श्रीवास्तव, साथी ताराचंद अमित, ............गोविंद नारायण आदि शामिल रहे।

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